Monday, March 03, 2014

बंजारे

थोड़े बंजारों से
थोड़े फ़कीरों से
तो हम भी हैं

परे दहलीज़ कि
लकीरों से तो
थोड़े हम भी हैं

बारिशों में
बेह गए तिनके जो
थोड़ा उनका गम भी है

पर उड़ानों को हमारी
ये आसमान पड़ता
थोड़ा कम भी है

2 comments:

Mayuri 'Meera' said...

That's so well written!! Will we see this made into a song too?

Nivedita Agashe said...

Thank you! :) Hmmm..Doesn't really fit into Jaagar's tone of voice... but let's see...