थोड़े बंजारों से
थोड़े फ़कीरों से
तो हम भी हैं
परे दहलीज़ कि
लकीरों से तो
थोड़े हम भी हैं
बारिशों में
बेह गए तिनके जो
थोड़ा उनका गम भी है
पर उड़ानों को हमारी
ये आसमान पड़ता
थोड़ा कम भी है
थोड़े फ़कीरों से
तो हम भी हैं
परे दहलीज़ कि
लकीरों से तो
थोड़े हम भी हैं
बारिशों में
बेह गए तिनके जो
थोड़ा उनका गम भी है
पर उड़ानों को हमारी
ये आसमान पड़ता
थोड़ा कम भी है